Promise day sad shayari love, sad shayari for promise day with image, sad shayari for love in hindi by promise day
1
मत पूछ ज़िन्दगी कैसे गुजरती है तन्हाई में,
आँखों से बरसते हैं आँसू उनकी जुदाई में,
न जाने किस जुर्म की सजा मिली है मुझे,
बहुत रोता है दिल मेरा उनकी बेवफाई में।
2
तुम्हें क्या बताये इश्क़ में मिलता है दर्द क्या...
मरहम भी पिघल जाते हैं ज़ख्म की गहराई देखकर।
3
दर्द ही दर्द है दिल में बयान कैसे करें,
ज़िंदगी ग़मों की गुलाम रिहा कैसे करें,
यूँ तो हमें हमारे दिल ने धोखे दिए बहुत,
पर अपने दिल से हम दगा कैसे करें।
4
दिल का दर्द छुपाना कितना मुश्किल है,
ग़म में मुस्कुराना कितना मुश्किल है,
दूर तक जब चलो किसी के साथ,
फिर तन्हा लौट के आना कितना मुश्किल है।
5
इस मोहब्बत की किताब के,
बस दो ही सबक याद हुए,
कुछ तुम जैसे आबाद हुए,
कुछ हम जैसे बरबाद हुए।
6
तेरी आँखों में सच्चाई की एक राह दिखाई देती है,
तू है मोहब्बत का दीवाना ऐसी चाह दिखाई देती है,
माना कि ठोकर खाई है जमाने में बेवफाओं से,
पर तू आशिक है तुझमें मोहब्बत की चाह दिखाई देती है।
7
तुम अगर याद रखोगे तो इनायत होगी,
वरना हमको कहाँ तुम से शिकायत होगी,
ये तो बेवफा लोगों की दुनिया है,
तुम अगर भूल भी जाओ तो रिवायत होगी।
8
जरा-सा झूठ ही लिख दो
कि तुम बिन दिल नहीं लगता,
हमारा दिल बहल जाए
तो तुम फिर से मुकर जाना।
9
जिंदगी जैसी एक हसीं शै को,
चंद ख्वाबों ने कर दिया बरबाद,
कुछ हसीनों ने कर दिया घायल,
कुछ शराबों ने कर दिया बरबाद।
10
मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उस का,
इरादा मैंने किया था कि छोड़ दूँगा उसे।
11
चलो अच्छा हुआ काम आ गयी दीवानगी अपनी,
वरना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते।
12
मुझसे नजरें तो मिलाओ कि हजारों चेहरे,
मेरी आँखों में सुलगते हैं सवालों की तरह,
जुस्तजू ने किसी मंजिल पे ठहरने न दिया,
हम भटकते रहे आवारा ख्यालों की तरह।
13
तेरी ये रेशमी ज़ुल्फ़ें हैं एक जंजीर के टुकड़े,
मेरी नस-नस में बसे है तेरी तस्वीर के टुकड़े,
अगर यकीन ना आये तो दिल चीर के दिखा दूँ,
मेरे दिल से भी निकलेंगे तेरी तस्वीर के टुकड़े।
14
बहुत चाहा उसको जिसे हम पा न सके,
ख्यालों में किसी और को हम ला न सके,
उसको देखकर आँसू तो पोंछ लिए,
लेकिन किसी और को देखकर हम मुस्कुरा न सके।
15
दुनिया ने हम पे जब कोई इल्जाम रख दिया,
हमने मुकाबिल उसके तेरा नाम रख दिया,
इक ख़ास हद पे आ गई जब तेरी बेरुखी,
नाम उसका हमने गर्दिशे-अय्याम रख दिया।
16
हमने भी कभी चाहा था एक ऐसे शख्स को,
जो था आइने से नाज़ुक मगर था संगदिल।
17
प्यास दिल की बुझाने वो कभी आया भी नहीं,
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं,
बेरुखी इससे बड़ी और भला क्या होगी,
एक मुद्दत से हमें उसने सताया भी नहीं।
18
चाहत की राह में बिखरे अरमान बहुत हैं,
हम उसकी याद में परेशान बहुत हैं,
वो हर बार दिल तोड़ता है ये कह कर,
मेरी उम्मीदों के अभी मुकाम बहुत हैं।
19
ज़िंदा रहे तो क्या है जो मर जाएं हम तो क्या,
दुनिया से खामोशी से गुजर जाएं हम तो क्या,
हस्ती ही अपनी क्या है इस ज़माने के सामने,
एक ख्वाब हैं जहान में बिखर जायें हम तो क्या।
20
मौसम को मौसम की बहारों ने लूटा,
हमें तो कश्ती ने नहीं किनारों ने लूटा,
आप तो डर गए हमारी एक ही अदा से,
हमें आपकी कसम देकर हजारों ने लूटा।
21
खोकर हमें फिर पा न सकोगे,
जहाँ हम होंगे वह आ न सकोगे,
हरपल हमें महसूस तो करोगे लेकिन
पर हम होंगे वहां जहाँ से
हमें फिर बुला न सकोगे।
22
अब आयें या न आयें इधर... पूछते चलो,
क्या चाहती है उनकी नजर पूछते चलो,
हमसे अगर है तर्क-ए-ताल्लुक तो क्या हुआ,
यारो कोई तो उनकी खबर पूछते चलो।
23
मंजिल भी उसी की थी रास्ता भी उसका था,
एक हम अकेले थे काफिला भी उसका था,
साथ साथ चलने की कसम भी उसी की थी,
और रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था।
24
तिश्नगी जम गई पत्थर की तरह होंठों पर,
डूब कर भी तेरे दरिया से मैं प्यासा निकला।
25
कुछ रिश्तों को कभी भी नाम ना देना तुम,
इन्हें चलने दो ऐसे ही इल्जाम ना देना तुम,
ऐसे ही रहने दो तुम तिश्नग़ी हर लफ़्ज़ में,
कि अल्फ़ाज़ों को मेरे अंज़ाम ना देना तुम।

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