WhatsApp Shayari

WhatsApp Shayari

 
भूल न जाना अपनी वफ़ा की उन कसमों को,
तोड़ न देना हमारे प्यार की उन रस्मों को,
आप हमें याद करो या न करो कोई बात नहीं,
बस याद रखना साथ बिताये उन लम्हों को।

जिंदगी ख़ाक न थी ख़ाक उड़ाते गुजरी,
तुझसे क्या कहते तेरे पास जो आते गुजरी,
दिन जो गुजरा तो तेरी किसी याद में गुजरा,
रात आई तो कोई ख्वाब दिखाते गुजरी।

नया कुछ भी नहीं हमदम वही आलम पुराना है,
तुम्हें भुलाने की कोशिश है तुम्हीं को याद आना है।

जब याद आती है आपकी तो मुस्कुरा लेते हैं,
कुछ पल के लिए गम भुला लेते हैं,
कैसे भीग सकती हैं आपकी पलकें,
जब आपके हिस्से के आँसू हम बहा लेते हैं।

बंद रखते हैं जुबान लब खोला नहीं करते,
चाँद के सामने सितारे बोला नहीं करते,
बहुत याद करते हैं हम आपको लेकिन,
अपना ये राज़ होंठों से खोला नहीं करते।

तेरे इंतजार में कब से उदास बैठे हैं,
तेरे दीदार में आँखे बिछाये बैठे हैं,
तू एक नज़र हम को देख ले बस,
इस आस में कब से बेकरार बैठे हैं।

मुद्दत से ख्वाब में भी नहीं नींद का ख्याल,
हैरत में हूँ ये किस का मुझे इंतज़ार है।

आपकी जुदाई भी हमें प्यार करती है,
आपकी यादें भी हमे बेकरार करती है,
आते जाते यूँ ही हो जाए मुलाकात आपसे,
तलाश आपको ये नजर बार बार करती है।

मेरी निगाह में फिर कोई दूसरा चेहरा नहीं आया,
भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का।

उनसे मिलने को तरसती हैं आँखें,
तरस तरस कर बरसती हैं आँखें,
बरस बरस कर जब थक जाती हैं आँखें,
तो फिर से मिलने को तरसती हैं आँखें।

रात देर तक तेरी दहलीज़ पर
बैठी रहीं आँखें,
खुद न आना था तो कोई
ख्वाब ही भेज दिया होता।

तुझको देखा तो फिर किसी को नहीं देखा,
चाँद कहता रहा मैं चाँद हूँ... मैं चाँद हूँ...।

निगाह उठे तो सुबह हो... झुके तो शाम हो जाये,
एक बार मुस्कुरा भर दो तो कत्ले-आम हो जाये।

उतरा है मेरे दिल में कोई चाँद नगर से,
अब खौफ ना कोई अंधेरों के सफ़र से,
वो बात है तुझ में कोई तुझ सा नहीं है,
कि काश कोई देखे तुझे मेरी नजर से।

क़यामत टूट पड़ती है ज़रा से होंठ हिलने पर,
ना जाने हश्र क्या होगा अगर वो मुस्कुराये तो।

आँखें तेरी हैं जाम की तरह,
एक बार देखूं तो नशा छा जाये,
होंठ तेरे जैसे खिलते कँवल,
बोले तो हर चीज़ महक जाये,
बाल हैं तेरे नागिन जैसे,
जैसे आसमान पे काली घटा छाए,
गालों पे वो गुलाब की सुर्खी,
मुझ को देख के जब तू शरमाये,
तुझको चलता देख के दिलबर,
चाँद भी बदली में छुप जाये।

कैसी बन गयी ये ज़िन्दगी,
न ठीक से जीने देती है न मरती है,
बस रुक गयी है एक पल में,
वक़्त तो बीतता जाता है,
पर हम वहीं के वहीं ठहरे हैं।

कब तक हम यूँ जियें तेरी यादों में...
एक बार तू भी तो मेरी तरह जी के देख...
तब तो तुझे पता चले कि हम कैसे जी रहे हैं
और कैसे तेरी यादों के आँसू पी रहे हैं..!

एक अजीब सा रिश्ता है
मेरे और ख्वाहिशों के दरमियाँ,
वो मुझे जीने नही देतीं
और मैं उन्हें मरने नही देता।

निकले हम दुनिया की भीड़ में तो पता चला,
कि हर वो शख्स अकेला है जो दूसरों पर भरोसा करता है।

ताल्लुक़ टूट कर बाद में जो कुछ भी रह गये,
मगर मोहब्बत में वो पहला मुस्कुराना हमेशा याद आता है।

सच कहूँ तो मुझे एहसान बुरा लगता है,
जुल्म सहता हुआ इंसान बुरा लगता है,
कितनी मसरुक हो गयी है ये दुनिया,
एक दिन ठहरे तो मेहमान बुरा लगता है।

​क्या गिला करें उनकी बातों का,
​क्या शिक़वा करें उन रातों से​​​,
​​कहें भला किसकी खता इसे हम​,
​​कोई खेल गया है मेरे जज्बातों से​।

चमन में जो भी थे नाफ़िज़ उसूल उसके थे,
तमाम काँटे हमारे थे और फूल उसके थे,
मैं इल्तेज़ा भी करता तो किस तरह करता,
शहर में फैसले सबको कबूल उसके थे।

अपने रुख पर निगाह करने दो
खूबसूरत गुनाह करने दो,
रुख से पर्दा हटाओ ऐ जाने-हया
आज दिल को तबाह करने दो।

शिकायत क्या करूँ दोनों तरफ ग़म का फसाना है,
मेरे आगे मोहब्बत है तेरे आगे ज़माना है,
पुकारा है तुझे मंजिल ने लेकिन मैं कहाँ जाऊं,
बिछड़ कर तेरी दुनिया से कहाँ मेरा ठिकाना है।

अमल से भी माँगा वफ़ा से भी माँगा,
तुझे मैंने तेरी रज़ा से भी माँगा,
न कुछ हो सका तो दुआ से भी माँगा,
कसम है खुदा की खुदा से भी माँगा।

फूल सबनम में डूब जाते है,
झख्म मरहम में डूब जाते है |
जब आते है खत तेरे, हम तेरे गम में डूब जाते है.|

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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से
मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँ नहीं करते
💎💙💎💙🌹🌹🌹



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